कोलकाता और भारत के अन्य हिस्सों में चावल की कीमतों में ढाई से पाँच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है, खासकर बांग्लादेश के लिए निर्यात फिर से शुरू होने के बाद। यह वृद्धि 12 अगस्त 2025 को भारत द्वारा चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के साथ शुरू हुई। अगले दिन बांग्लादेश ने निजी व्यापारियों द्वारा लगभग पांच लाख टन चावल आयात को बिना आयात शुल्क के अनुमति दे दी। 

इस कदम के तुरंत बाद भारतीय बाजारों में मांग बढ़ने लगी। बांग्लादेशी निर्यात की बढ़ती मांग के चलते स्थानीय आपूर्ति सीमित हो गई और परिणामस्वरूप कोलकाता में भी चावल की कीमतें बढ़ गईं। 

उदहारण के तौर पर, स्वर्णा, मिनीकेट, रत्ना तथा सोना मसूरी जैसे लोकप्रिय चावल के ब्रांड्स की खुदरा कीमतों में अचानक वृद्धि देखी गई। हालांकि टाइप-विशेष रूप से संबंधित डेटा रिपोर्ट में सीधे नहीं दिया गया है, लेकिन अन्य स्रोतों में स्वर्णा ₹34 से ₹39 प्रति किलोग्राम तक, मिनीकेट ₹49 से ₹55, रत्ना ₹36–37 से ₹41–42, और सोना मसूरी ₹52 से ₹56 प्रति किलोग्राम तक बढ़ने की चर्चा हो चुकी है। 

महँगाई के इस दौर में, घरेलू परिवारों ने अपनी खर्च-बजट समायोजित करते हुए सस्ते चावल की ओर रुख किया है। आम परिवार इस परिस्थिति में खर्च बचाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे सस्ते विकल्पों की मांग और बढ़ गई है। 

इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक व्यापार नीतियों में तेजी से आए बदलाव—जैसे कि निर्यात प्रतिबंध का हटना या आयात नीति में ढील—प्रभावी रूप से स्थानीय बाजारों की स्थिति और आम जनता के दैनिक जीवन पर तत्काल प्रभाव डाल सकते हैं।