नई दिल्ली, 26 अगस्त 2025 - जैसे ही अमेरिकी गृह रक्षा विभाग ने घोषणा की कि अमेरिका भारतीय मूल की सभी वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% का टैरिफ लगाएगा, जिससे कुल शुल्क 50% तक पहुँच जाएगा, भारतीय निर्यातकों की चिंताएँ चरम पर पहुँच गईं । यह दर उन सबसे ऊँचे वाणिज्यिक शुल्कों में शामिल होगी जो अमेरिका ने किसी विदेशी व्यापारिक साथी के लिए निर्धारित किए हैं ।

नए टैरिफशिपमेंट्स चाहे वे अमेरिका में पहुंच रहे हों या कस्टम वेयरहाउस से निकाले जा रहे हों पर सुबह 12:01 ईडीटी (रात के लगभग 9:31 बजे भारतीय समय) से प्रभावी होंगे । हालांकि कुछ सामान जैसे कि जो ज़रूरतमंद सहायता के तहत हैं, ट्रांज़िट में हैं, या द्विपक्षीय व्यापार कार्यक्रमों के तहत आते हैं उनके लिए छूटों का प्रावधान रखा गया है ।


इस खबर के बाद भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ 0.2% की गिरावट के साथ यह ₹87.75 प्रति डॉलर पर पहुँच गया । शेयर बाजारों NSE और BSE में भी लगभग 0.8% की गिरावट देखी गई ।

सरकार ने निर्यातकों के लिए राहत उपाय भी घोषित किए हैं। उन्होंने वित्तीय सहायता, बैंक ऋणों पर सब्सिडी, और वैकल्पिक बाजारों की ओर निर्यात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन की नीति अपनाई है। इनमें खासकर टेक्सटाइल्स, खाद्य प्रसंस्कृत वस्तुएँ, चमड़े के उत्पाद और समुद्री वस्तुएँ शामिल हैं। सरकार ने लगभग 50 देशों को वैकल्पिक बाज़ारों के रूप में चिन्हित किया है ।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया तीव्र रही। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष पंकज चड्ढा का कहना है कि “अमेरिकी ग्राहक पहले ही नए ऑर्डर रोक चुके हैं। सितंबर से निर्यात 20–30% तक गिरने की आशंका है” । साथ ही, निर्यातकों का कहना है कि वैकल्पिक बाजारों में संरक्षण सीमित और घरेलू बाज़ार में मांग अपर्याप्त है ।

विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि ये टैरिफ स्थायी रूप में लागू रहते हैं तो 2025 और 2026 की आर्थिक वृद्धि दर में लगभग 0.8 प्रतिशत अंक की गिरावट आ सकती है । क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने भी भारत की अर्थव्यवस्था पर संभावित रूप से यह कदम “मॉडरेट डाउनसाइड रिस्क” है, कहा है और नोट किया है कि घरेलू पूंजीगत व्यय और निजी खपत अंततः कुछ राहत दे सकती है ।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि अन्य प्रमुख तेल आयातकों जैसे चीन और यूरोपीय संघ पर समान कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे नीति असंगत प्रतीत होती है ।

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के हितों की रक्षा का संकल्प व्यक्त किया है, भले ही इसके लिए मूल्य चुकाना पड़े। इसके अलावा, उनकी चीन यात्रा की तैयारी को एक कूटनीतिक संतुलन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है ।