ओपन-बुक परीक्षा प्रणाली के अंतर्गत छात्र परीक्षा के दौरान पाठ्यपुस्तकें, क्लास नोट्स अथवा अनुमोदित संदर्भ सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। इस परिवर्तन का उद्देश्य रटने पर निर्भर पारंपरिक परीक्षा प्रणाली से हटकर अवधारणाओं की गहराई से समझ, विश्लेषण और जानकारी का आवेदन करने की क्षमता को परखना है ।
इस प्रस्ताव के पीछे एक पायलट अध्ययन का सहारा लिया गया था, जिसे दिसंबर 2023 में कक्षा 9 से 12 तक कुछ विषयों—जैसे अंग्रेजी, गणित, विज्ञान (कक्षा 9 और 10), और गणित, अंग्रेजी, जीवविज्ञान (कक्षा 11 व 12)—में लागू कर देखा गया था। इस अध्ययन में छात्र प्रदर्शन 12% से 47% तक रहा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि संदर्भ सामग्री का प्रभावी उपयोग और विविध विषयों को एकीकृत रूप से समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है । बावजूद इसके, शिक्षकों ने ओपन-बुक असेसमेंट की संभावनाओं को सकारात्मक रूप से देखा और इसे छात्रों में तर्क-शक्ति एवं आलोचनात्मक सोच विकसित करने में सहायक माना ।
अब CBSE इस नए प्रारूप को सुसंगत ढंग से लागू करने हेतु मानकीकृत व्यवहार्य प्रश्नपत्रों (standardised sample papers) और निर्देशों का ढांचा तैयार करेगा, ताकि प्रश्नवाचक रूप से गुणवत्ता सुनिश्चित हो और छात्रों को संदर्भित सामग्री का सही उपयोग करने में मार्गदर्शन मिल सके । यह बदलाव अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जाएगा—स्कूलों को इस प्रणाली को अपनाने की क्षमता और इच्छा अनुसार विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा ।
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और शैक्षणिक ढाँचे (NCFSE 2023) की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये दोनों पारंपरिक पाठांतर आधारित शिक्षा से हटकर योग्यता-आधारित (competency-based) शिक्षा की वकालत करते हैं ।
इससे न केवल परीक्षा का दबाव कम हो, बल्कि छात्रों की रचनात्मक, विश्लेषक एवं वास्तविक-जगत् से जुड़ी सोच को भी बढ़ावा मिलेगा।
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