2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिमस्खलन-स्तर की सीमा संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद भारत ने चीनी निवेशों पर पाबंदियाँ लगाने और आयातों की कड़ी जांच करने जैसे कई कदम उठाए थे। वायु संपर्क न होने के कारण यात्री को हांगकांग, सिंगापुर जैसे शहरों के जरिए यात्रा करनी पड़ती थी ।
हाल के महीनों में हालांकि तनाव में कुछ नरमी देखी गई है। पिछले वर्ष डेपसांग और डेमचोक क्षेत्र में सेनाओं की वापसी का कार्य पूरा हुआ था, जिससे संबंधों में कुछ राहत मिली । इसके साथ ही चीन को जारी किए जा रहे पर्यटक वीज़ों को फिर से बहाल करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगस्त के अंत में चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तियानजिन जा रहे हैं। यह उनकी 2019 के बाद पहली बड़ी यात्रा होगी। चीन ने इस सम्मेलन का ‘एकता, मित्रता और सार्थक परिणाम’ वाला मंच बनाने की उम्मीद जताई है । वहीं, इस सम्मेलन के दौरान डायरेक्ट फ्लाइट्स के फिर से शुरू होने की आधिकारिक घोषणा होने की भी संभावना जताई जा रही है ।
इस कदम को दोनों देशों के बीच बिगड़े हुए रिश्तों में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। एयरलाइनों को शॉर्ट नोटिस पर उड़ानें चलाने को कहा जाना स्पष्ट रूप से वायु संपर्क के बहाली की तीव्रता को दर्शाता
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