कुड्डालोर रेल हादसा: सेम्मनकुप्पम त्रासदी को लेकर सामने आए विरोधाभासी दावे

कुड्डालोर, 8 जुलाई, 2025:
कुड्डालोर जिले के सेम्मनकुप्पम में मंगलवार (8 जुलाई) सुबह हुए दर्दनाक हादसे को लेकर अब विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं। विलुप्पुरम–मयिलादुथुराई पैसेंजर ट्रेन और एक स्कूल वैन के बीच टक्कर में तीन छात्रों की मौत हो गई।

हादसा गेट नंबर 170 पर हुआ, जो कि कुड्डालोर और अलप्पक्कम के बीच स्थित एक मैनुअल (गैर-इंटरलॉक्ड) गेट है। यह वैन कृष्णास्वामी विद्यनिकेतन नामक निजी सीबीएसई स्कूल की थी। हादसे में चार छात्र सवार थे, जो सुबह की पाली में स्कूल जा रहे थे।

दक्षिण रेलवे के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि हादसे के वक्त गेट बंद था, लेकिन वैन चालक ने स्कूल पहुंचने में देरी से बचने के लिए गेट पार करने की जिद की। गेटमैन पंकज शर्मा ने नियमों का उल्लंघन करते हुए उसे पार जाने की अनुमति दे दी। दक्षिण रेलवे ने कहा कि गेटमैन को निलंबित कर दिया गया है और सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया है कि ट्रेन के पहुंचने से पहले ही गेट खुला हुआ था और गेटमैन ने आने वाली ट्रेन को नहीं देखा। सेम्मनकुप्पम निवासी अन्नादुरई ने बताया कि उन्होंने एक जोरदार आवाज और बच्चों की चीखें सुनीं। “मैंने अपनी कंपाउंड वॉल से देखा, तो वैन के टुकड़े ट्रैक के किनारे पड़े थे और गेट खुला था। मैं बच्चों को बचाने दौड़ा, तभी ओवरहेड केबल के संपर्क में आ गया,” उन्होंने कहा।

एक अन्य चश्मदीद बनुमति ने बताया कि ट्रेन का लोको पायलट लगातार हॉर्न बजा रहा था। “मैंने बाहर देखा तो गेट खुला था। शोर सुनकर आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। हादसा सुबह करीब 7:24 बजे हुआ,” उन्होंने कहा।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वैन चालक लंबे समय से यह काम कर रहा था। “जब शंकर को कुड्डालोर गवर्नमेंट जनरल अस्पताल लाया जा रहा था, मैंने उससे बात की। उसने बताया कि गेट खुला था, तभी उसने वैन पार कराई,” एक अस्पताल में मौजूद व्यक्ति ने कहा।

घायलों में शामिल छात्र विष्वेश के एक रिश्तेदार ने बताया कि वैन थोंडामनाथम–सेम्मनकुप्पम से रवाना हुई थी, और उस समय उसमें सिर्फ चार छात्र सवार थे। “यह वैन गेट पार कर छात्रों को उठाती है और फिर स्कूल जाने के लिए उसी गेट से लौटती है,” उन्होंने कहा।

दिल दहला देने वाले दृश्य
कुड्डालोर गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल की क्रिटिकल केयर यूनिट के पास हृदय विदारक दृश्य देखने को मिले, जब चारुमति और निमलेश के शवों को पोस्टमार्टम के लिए लाया गया। उनके परिजन और सहपाठी रोते-बिलखते नजर आए। शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।

चारुमति के भाई चेझियन को पुदुचेरी स्थित जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। उनका शव भी पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया। श्रम एवं कौशल विकास मंत्री सी. वी. गणेशन ने अस्पताल पहुंचकर दिवंगत छात्रों के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किए।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
विलुप्पुरम सांसद डी. रविकुमार ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार यह हादसा गेटमैन की लापरवाही के कारण हुआ। उन्होंने कहा, “तिरुचि डिवीजन में करीब 490 मैनुअल लेवल क्रॉसिंग हैं। इनमें से अधिकतर गेटमैन उत्तर भारत से हैं। रेलवे को चाहिए कि वह स्थानीय लोगों की नियुक्ति पर विचार करे। साथ ही, रेलवे को पुल या अंडरपास निर्माण की शर्तों में ढील देनी चाहिए।” उन्होंने पीड़ित परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को बढ़ाकर ₹10 लाख करने की मांग की।

उपभोक्ता अधिकार संगठन ‘एम्पावर इंडिया’ ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक ज्ञापन सौंपकर सभी रेल गेटों पर स्वचालित संचालन प्रणाली, इंटरलॉकिंग सिग्नल टेक्नोलॉजी, और संवेदनशील क्रॉसिंग पर सायरन की व्यवस्था करने की मांग की। संगठन ने हादसे की समग्र जांच, दोषियों की पहचान, और विशेषकर स्कूली बच्चों और ग्रामीण इलाकों के लिए सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया।

यह हादसा एक बार फिर मैनुअल गेट व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है और रेलवे सुरक्षा के लिए त्वरित तकनीकी सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है|