इस दोषसिद्धि तक पहुंचने में ट्रायल लगभग १४ महीने का लंबा रहा। अभियोजन पक्ष ने २६ गवाहों को क्रॉस‑एक्सामिन किया और लगभग १८० दस्तावेज़ों को पेश किया गया । अदालत ने उनके खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं जैसे ३७६(२)(क), ३७६(२)(न), ३५४‑ए, ३५४‑बी, ३५४‑सी, ५०६, २०१ और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा ६६E के तहत आरोप तय किए थे ।
निर्णय के बाद रेवन्ना अदालत में भावुक हो उठे और रोते हुए अपनी जगह छोड़कर बाहर निकले। अदालत ने बताया कि सजा की घोषणा शनिवार को की जाएगी ।
4 अप्रैल २०२४ को लोकसभा चुनावों की तारीख से ठीक पहले रेवन्ना के खिलाफ कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें आरोपित उन्हें यौन संबंध बनाते देखे गए। यह वीडियो पेन ड्राइव के माध्यम से बड़े पैमाने पर हासन जिले में वितरित किए गए थे, जिस पर राज्य सरकार ने सीआईडी-एसआईटी की विशेष जांच टीम गठित की थी ।
पहला ट्रायल २ मई २०२५ को शुरू हुआ, जिसमें पीड़िता की गवाही दर्ज की गई थी। दूसरा ट्रायल मामला २८ मई से शुरु हुआ जिसमें एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य को अधिकार का दुरुपयोग कर शारीरिक उत्पीडन का आरोप था । कुल मिलाकर चार मामलों में वादी विभिन्न आरोपों में रेवन्ना पर मुकदमे चल रहे हैं ।
उल्लेखनीय है कि इस दोषसिद्धि के साथ ही रेवन्ना तत्काल सदस्यता खो सकते हैं, क्योंकि Representation of the People Act के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक की सज़ा मिलने पर सांसद या विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है ।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह मामला विशेष महत्व रखता है क्योंकि एक समय रेवन्ना भविष्य का एक प्रमुख जेडीएस नेता माना जाता था। लेकिन इस दोषसिद्धि से उनके राजनीतिक भविष्य और परिवार की प्रतिष्ठा दोनों को खासी चोट पहुँची है ।
वर्तमान में केवल एक मामले की सुनवाई पूरी हुई है और शेष तीन मामलों की सुनवाई अभी जारी है। शनिवार को सज़ा की घोषणा के बाद इन मामलों में अगली कार्रवाई में स्पष्टता आएगी।

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