इस दौर की वार्ता ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों ने हाल के महीनों में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के कई कदम उठाए हैं। यह यात्रा SCO (शंघाई सहयोग संगठन) की बैठक से पहले की जाने वाली महत्वपूर्ण पहल प्रतीत होती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तियानजिन (चीन) में इस महीने के अंत में मुलाकात करने वाले हैं ।
तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होने वाली SCO शिखर बैठक में 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे। चीन ने भारत की इस बैठक में भागीदारी का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती देने की आशा व्यक्त की है । चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह सम्मेलन एकता, दोस्ती और सार्थक परिणामों का मंच बनेगा, और SCO उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के नए चरण में प्रवेश करेगा ।
इसके अलावा, भारत और चीन पहले ही पूर्वी लद्दाख के देपसांग मैदान और डेमचोक क्षेत्रों में LAC (लाइऩ ऑफ एक्टुअल कंट्रोल) पर नियंत्रण सीमाओं को लेकर फिर से गश्त और बॉर्डर से जुड़ी गतिविधियों को सामान्य करने पर सहमत हो चुके हैं । इससे सीमाओं पर तनाव को कम करने और शांति बहाली की दिशा में सकारात्मक माहौल बना है।
सांस्कृतिक और लोग-से-लोग कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी पुनः शुरू कर दिया गया है, जो हिन्दू तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी भूमिका निभाता है । इसके अलावा, लगभग पाँच वर्षों के बाद चीन के नागरिकों के लिए भारत का पर्यटक वीजा जारी होना भी एक सकारात्मक संकेत है। व्यापार संबंधों में भी गति आई है—भारत से चीन को तीन वर्षों में पहली बार डीजल शिपमेंट भेजा गया ।
यह यात्रा इस बात का संदेश देती है कि हालिया समय में दोनों देशों के बीच व्यापक स्तर पर संवाद, व्यापार, सांस्कृतिक और सुरक्षा संबंधों में सुधार की कोशिशें जारी हैं। NSA अजीत डोवाल और वांग यी की यह बातचीत इन प्रयासों को और गति प्रदान कर सकती है।
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