रिलायंस समूह द्वारा संचालित वन्यजीव पुनर्वास केंद्र ‘वंतर’, जो गुजरात के जामनगर में स्थित है, ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘महादेवी हाथी मामले’ के सिलसिले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित किए जाने की घोषणा को “पूरा सम्मान” देते हुए स्वीकार कर लिया है। वंतर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि वह पूरी पारदर्शिता, सहनुभूति और कानूनी अनुपालन के प्रति प्रतिबद्ध है। उनका मिशन निरंतर पशु बचाव, पुनर्वास और देखभाल करना ही रहेगा, और इस प्रक्रिया में वे एसआईटी को पूर्ण सहयोग देंगे। वंतर ने यह भी अनुरोध किया है कि यह जांच बिना किसी अटकलों के, केवल पशुओं के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़े ।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दो जनहित याचिकाओं (PILs) पर सुनवाई के बाद एसआईटी गठन का निर्देश दिया है। इन याचिकाओं में पशुओं की अवैध तरीके से लाकर रखे जाने, विशेषकर हाथियों की स्वतंत्रता का उल्लंघन, वित्तीय अव्यवस्थाएं, और वंतर पर वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) अधिनियम, 1972 और सीआइटीज़ (CITES) के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था ।

न्यायालय की सुनवाई के दौरान यह भी देखा गया कि इन याचिकाओं में प्रस्तुत सबूत मात्र समाचार रिपोर्ट, सोशल मीडिया और पशु संरक्षण संस्थाओं की शिकायतों तक सीमित थे, जिनमें कोई ठोस सबूत नहीं था। फिर भी, न्यायालय ने अदालत के प्रति सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने और तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एसआईटी गठन को उचित माना ।

एसआईटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस जस्टि चेलमेश्वर करेंगे, जिसमें उत्तराखंड और तेलंगाना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र चौहान, पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त हेमंत नागरले और भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी अनिश गुप्ता भी शामिल हैं । इस टीम को कई मुद्दों पर जांच करनी है—जैसे कि भारत और विदेश से पशुओं का अधिग्रहण, विशेषकर हाथियों का, वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) अधिनियम और CITES का अनुपालन, पशु चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता, क्या वंतर एक निजी “शौकीन संग्रह” मात्र तो नहीं, जल या कार्बन क्रेडिट का दुरुपयोग, वित्तीय गड़बड़ियाँ आदि ।

एसआईटी से निर्देशित रिपोर्ट 12 सितंबर, 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में जमा करनी होगी, और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी ।