केंद्रीय प्रवेश पोर्टल (CAP) के पहले चरण में, कुल 402,557 सीटें 309,667 योग्य आवेदकों को आवंटित की गईं, इसका मतलब है कि केवल संख्या में लगभग 4 लाख छात्रों को ही एडमिशन मिल पाया, जबकि पाठ्यक्रमों में कुल 9.5 लाख सीटें उपलब्ध थीं—इससे अनुमान होता है कि लगभग 5 से 6 लाख सीटें खाली रह सकती हैं।
कई कॉलेजों में, जैसे कि लेडी ब्रैब्रोन कॉलेज में 629 सीटों में से केवल 218 पर ही नामांकन हुआ, बासंती देवी कॉलेज में 1,230 सीटों में से केवल 229, और बेथ्यून कॉलेज में 678 सीटों में से सिर्फ 182 सीटें भरी गईं—ये आंकड़े दिखाते हैं कि सीटों की भरपाई काफी कम रही।
शिक्षा विभाग के अधिकारीयों ने यह स्थिति HS परीक्षा (Higher Secondary) पास करने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट और कानूनी अड़चनों से जोड़ी है—विशेष रूप से OBC आरक्षण से संबंधित विवादों ने कारण माना गया।
ऐसे हालात में, कई कॉलेजों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है—कالج के उपलब्ध संसाधनों, इंटर्नशिप और वर्कशॉप जैसी विशेषताओं को प्रचारित कर आकर्षण बढ़ाने की कोशिश की गई है ताकि छात्र वापस आकर्षित हों।
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