इस मार्च की अगुआई अभया की माता-पिता, विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी, बीजेपी विधायक अशोक ڈिंडा और अग्निमित्रा पाल कर रहे थे। सड़क पर भारी बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शनकारी कोशिश कर रहे थे नबन्ना सचिवालय तक पहुँचने की, लेकिन पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज से मार्च रुक गया।
पूरे मामले की जांच खुद कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा ने suo motu यानी स्वतः संज्ञान लेकर शुरू कर दी है। घटना की गहराई से पड़ताल के लिए ड्रोन वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, बॉडीकैम और अन्य रिकॉर्डिंग देखे जा रहे हैं। वहीं, अभया की मां की अस्पताल में भर्ती के दौरान अस्पताल द्वारा इलाज रोकने की भी संदेहजनक कहानी सामने आई है—परिवार का आरोप है कि सरकार ने दबाव बनाकर उन्हें भर्ती से वंचित रखा।
इसी दौरान, पुलिस ने इस मार्च से जुड़े बीजेपी नेताओं—अशोक डिंडा, अग्निमित्रा पाल, कौस्तव बागची समेत—के खिलाफ पुलिस कर्मियों को धमकाने, कार्य में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में सात एफआईआर दर्ज कराए हैं। इनमें अशोक डिंडा पर पुलिसकर्मियों को धमकाने का वीडियो फुटेज भी पाया गया है।
---
परिस्थितियों का समग्र चित्र:
मुद्दा स्थिति
पुलिस कार्रवाई लाठीचार्ज द्वारा मार्च रोकना, प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग
परिवार का आक्रोश मां घायल, इलाज में बाधा, न्याय की मांग
जांच सीसीटीवी/ड्रोन फुटेज से घटना की गहन छानबीन
राजनीतिक टकराव विपक्ष और सरकार एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप
---
यह घटना यह दर्शाती है कि अभया की बरसी को न्याय की मांग से जोड़कर शांति और संवेदनशीलता से मनाए जाने वाला प्रदर्शन अचानक तिकड़मी कार्रवाई और राजनीतिक तनाव का नया मोड़ ले चुका है।
0 टिप्पणियाँ