गृह मंत्री ने लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत से कार्रवाई कर रही हैं और घाटी में शांति एवं स्थिरता बनाए रखना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आतंकी गतिविधियों को जड़ से खत्म करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
विपक्षी दलों ने सरकार पर खुफिया तंत्र की विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार होने वाले आतंकी हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री से सीधे बयान देने की मांग की।
राज्यसभा में भी पहलगाम हमले पर जोरदार बहस हुई। कई सांसदों ने आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा मंत्री ने विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद पर भारत की नीति स्पष्ट और सख्त है। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में बड़ी सफलता मिली है और कई आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए गए हैं।
वहीं, सरकार ने सत्र के दौरान आर्थिक सुधारों से जुड़े कुछ बिल भी पेश किए, जिन पर आगे की चर्चा बुधवार को होगी। मानसून सत्र का यह चरण सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विपक्ष-सरकार के टकराव के बीच खासा गरम रहा।
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